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कितने नामों से बनाएंगे कानून

कितने नामों से बनाएंगे कानून

कितने नामों से बनाएंगे कानून

बलात्कार पीड़िता के नाम पर कानून बनाने की बात कोरी बकवास 
हैं. इस प्रकार की घटना होने के बाद जागना  और कानून बनाने की चाह तो सही हैं, पर यह नाम
हमें बार
बार  याद दिलाता रहेगा कि हम किस गंभीर चोट से
गुजरे है . वैसे भी हमारे देश में यह पुरानी परंपरा है कि किसी को सच्ची
श्रद्धाजंली देनी है तो डाक टिकट उसके नाम पर निकाल दो, नोट छाप दो, सड़क और गली
या किसी सड़े से चौराहे का नाम उसके नाम पर रख दो . अब हम गांधी जंयती पर बापु को
ठिक से याद नहीं करते उनके  कई मूर्तियां तो साफ तक नहीं होती ,  उनके फोटो के नीचे ही
नोटों के साथ हाथ मिलाते हैं. 
याद रहे कि ये हमारे राष्ट्रपिता का हाल है. 

क्या दामनी के नाम पर कानून बनाना उसका अपमान नहीं
होगा . हम जानते हैं कि अगर अगले साल चौराहो पर कुछ लोग मोमबत्ती के साथ नजर आयेगें,
और हर साल ये लोग कम होते जाएंगे और एक दिन हममें से कोई पुछ बैठेगे यार ये लॉ
किसी के नाम पर क्युं है. अब कुछ लोग उनके परिवार के लिये अशोक चक्र की मांग कर
रहे, महोदय उनके परिवार को सहानभूति की जरूरत है जो दर्द उनको मिला है उसे समझने
की जरूरत है . हां वो एक सैनिक की तरह मौत से लड़ती रही उसने साहस दिखाया अगर वो
जिंदा रहती तो चाहती कि
जिसके कारण उसे यह
दिन देखना पड़ी उनको कड़ी सजा मिले, जब तक उसकी जान में जान थी वो पुछती रही के
क्या वो पकड़े गये, अगर हम कोई मिशाल ही कायम करना चाहते है तो
  इन मामलों की जल्द सुनवाई कर उन्हें कड़ी सजा
देकर करें. 

अब अगर इसके बाद आप कानून को जो भी नाम दो, और इस तरह के मामलों के
लिये कोई अन्य उपाय करो, पर इस तरह किसी गंभीर मामले का मजाक बना कर नहीं . अगर हर
मामलों पर हम कानून का नाम रखने लगें तो ऐसे कई जुर्म है जिनमें कठोर सजा नहीं
होती, तो हर संशोधन पर नया नाम तो नहीं दिया जा सकता हैं . पर इस देश में कुछ भी
हो सकता है. किसी के खानदान के नाम पर योजनाओं का नाम चल सकता है तो कानून के नाम
में भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है . तो बस नये नये नामों पर कानून बनाए और खुश हो
जाएं इस मामले के बाद भी क्या हम गांरटी दे सकते है कि इस से ज्यादा गंभीर मामला
हमारे पास नहीं आऐगा . खुद़ा ना करें अगर इस से भी गंभीर कोई मामला आ गया तो क्या
हम दामनी के नाम पर बनाए कानून को नया नाम दे दें,.

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