📅 Tuesday, 24 March 2026
Breaking
Dhurandhar 2 Explained: Propaganda या Reality? Ranbir Film पर बड़ी बहसयूट्यूबर अनुराग डोभाल से सीखें आसान नहीं है सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की राह….राजनीति में न उम्र की सीमा, न रिटायरमेंट…कोलकाता यात्रा की कहानी :  20 रुपए में स्नान और 3000 रुपए में हुए मां काली के दर्शनगांव से गायब हो रहे हैं युवा : रोजगार की तलाश में भटक रहा है देश का भविष्यभोगनाडीह झडप के पीछे की राजनीति : सिदो कान्हों के बलिदान की नहीं झड़प की खबरेंDhurandhar 2 Explained: Propaganda या Reality? Ranbir Film पर बड़ी बहसयूट्यूबर अनुराग डोभाल से सीखें आसान नहीं है सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की राह….राजनीति में न उम्र की सीमा, न रिटायरमेंट…कोलकाता यात्रा की कहानी :  20 रुपए में स्नान और 3000 रुपए में हुए मां काली के दर्शनगांव से गायब हो रहे हैं युवा : रोजगार की तलाश में भटक रहा है देश का भविष्यभोगनाडीह झडप के पीछे की राजनीति : सिदो कान्हों के बलिदान की नहीं झड़प की खबरें
जाओ अब आखिरी सलाम तुम्हें …

जाओ अब आखिरी सलाम तुम्हें …

जाओ अब आखिरी सलाम तुम्हें, तुम भूल गये

जिंदगी बहुत कुछ देती है, तो  कुछ ले भी लेती है
अगर हंसाती तो कभी रुला भी देती है
जिंदगी है, तो सारी खुशियां है, गम हैं 
बताओ ना ऐसी भी क्या नाराजगी थी 
तुम कैसे भूल गये कि तुम्हारा हर दर्द सुनने के लिए हम हैं
जाओ अब आखिरी सलाम तुम्हें, तुम भूल गये
तुमसे ही तो सीखते थे कि मेहनत रंग लाती है
मेहनत में दम हो तो आसमां भी बाहें खोलकर बुलाती हैं 
दौलत, शोहरत, इज्जत , प्रेम , परिवार सब तो था तुम्हारे पास
 हम थे एक  बार ही सही कर लेते हम पर भी विश्वास 
दर्द था, तो कह देते कि तुम्हारी आंखे क्यों नम हैं 
तुम कैसे भूल गये कि तुम्हारा हर दर्द सुनने के लिए हम हैं
जाओ अब आखिरी सलाम तुम्हें, तुम भूल गये
तुम छिछोरे बनकर भी हम सभी छिछोरे दोस्तों के अपने थे
सच कहूं, तो अपने सपने भी कुछ तुम जैसे थे
आत्महत्या गलत है ,तुमने ही तो बताया था, 
लड़ना है जिंदगी में, जीतना है यही तो सिखाया था 
तुम खुद यूं हार गये इसी बात का गम है  
तुम कैसे भूल गये कि तुम्हारा हर दर्द सुनने के लिए हम हैं
जाओ अब आखिरी सलाम तुम्हें, पर नाराज रहेंगे हमेशा,ये बता दें तुम्हें
तुम अकेले नहीं हारे, हम भी हारे हैं तुम्हारे साथ 
स्टेज पर खड़े होकर जो तुम कहते थे उस पर अब हमें जरा भी नहीं रहा विश्वास 
माना भीड़ थी तुम्हारे शहर में पर कुछ तो होंगे जो तुम्हारे लिए अहम हैं 
तुम कैसे भूल गये कि तुम्हारा हर दर्द सुनने के लिए हम हैं
(मैं सुशांत सिंह राजपूत से जो कहना चाहता था )
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *