
PM Modi appeal to nation
देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी को 24 घंटे में दो – दो बार देशवासियों से अपील करनी पड़ी की सोना ना खरीदें। पीएम मोदी ने एक नहीं पूरी सात तरह की अपील की। कुछ लोग तो ऐसे नाराज हैं जैसे जेब की ऊपर वाली पॉकेट में दो किलो सोने का पैसा रखकर सोना खरीदने घर से निकले ही थे कि पीएम मोदी ने रोक दिया। पीएम मोदी ने सोने के साथ- साथ घूमने, खरीदारी करने सहित कई चीजों पर संयम की अपील की है। 1.सोना फिलहाल न खरीदें 2.विदेश यात्रा से बचें 3.EV और रेलवे को बढ़ावा दें 4.ईंधन और बिजली बचाएं 5.जैविक/प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें 6.स्थानीय उत्पाद खरीदें 7.अनावश्यक खर्च कम करके बचत बढ़ाएं। अपील का असर कितना होगा जवाब समय के साथ मिलेगा।
हर बार अपील करते हैं पीएम मोदी
कभी- कभी लगता है इस तरह के अपील की जरूरत क्या थी ? क्या देश में लोगों के पास इतना पैसा है कि वह सोना खरीद सकें, विदेश घूम सकें अगर हैं तो किनके पास है, कितने प्रतिशत लोगों के पास है। जब देश में इस तरह की अपील होती है तो इसका असर क्या होता है, अपील का इतिहास क्या है, कब- कब, क्यों, किन परिस्थितियों में हुआ है। पिछले कुछ दशकों में नेताओं की अपील का सफर देखें तो पीएम मोदी की अपील की लिस्ट काफी लंबी है। गिनने पर आयें तो ऊंगलिया कम पड़ जाएं एक लंबी सांस लेकर गिनना शुरू करते हैं।
स्वच्छता को लेकर अपील, LPG Subsidy छोड़ने की अपील, नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट अपनाने की अपील, एलईडी बल्ब से बिजली बचाने की अपील, फिट इंडिया के तहत योग करने की अपील , जल संरक्षण की अपील, कोरोना के समय तो ताली, थाली और दीपक/मोमबत्ती जलाने की अपील, लोकल सामान खरीदने की अपील, प्लास्टिक कम उपयोग, ऊर्जा बचत, रासायनिक खेती कम कर प्राकृतिक/जैविक खेती को बढ़ावा 2014 से लेकर अब तक की लिस्ट काफी लंबी है।
अपील का इतिहास
क्या देश के इतिहास में यह पहले प्रधानमंत्री या नेता हैं जो इस तरह की अपील कर रहे हैं ? कांग्रेस के कार्यकाल में वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने भी सोना कम खरीदने की अपील की थी। अलग-अलग समय पर प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों ने आर्थिक संकट, युद्ध, खाद्यान्न कमी, महंगाई या ऊर्जा संकट के दौरान इसी तरह की अपील की है। लाल बहादुर शास्त्री ने (1965–66) एक दिन उपवास रखने की अपील की थी। “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया था। इंदिरा गांधी ने (1970s) में पेट्रोल बचाने, फिजूलखर्ची कम करने और सादगी अपनाने की अपील की थी। मनमोहन सिंह ने (2008–09) में आर्थिक मंदी के दौरान सरकार ने अनावश्यक खर्च कम करने और वित्तीय अनुशासन बनाने की अपील की थी।
किसके पास कितना पैसा
इन अपीलों के इतिहास को देखकर लगता है हम भारतीय खूब फिजूलखर्ची करते हैं लेकिन खर्च करने के लिए पैसे होने भी तो चाहिए । अब सवाल है कि हमारे पास कितना पैसा है, किसके पास कितना है। भारत की प्रति व्यक्ति आय की स्थिति क्या है ? 2024-25 में भारत की औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति आय लगभग 2.05 लाख (Net National Income) आंकी गई है, औसतन लगभग 17 हजार रुपए हर महीने और हर दिन लगभग 560 रूपए के आसपास क्या इतना पैसा कमाने वाला व्यक्ति फिजूलखर्ची कर रहा होगा। विश्व बैंक के अनुसार लगभग 5.3% भारतीय अभी भी गरीबी रेखा के नीचे हैं। ग्रामीण गरीबी लगभग 4.86% शहरी गरीबी लगभग 4.09% के आसपास है। अर्थशास्त्री कहते हैं कि “सिर्फ जीवित रहने” वाली गरीबी कम हुई है, लेकिन बड़ी आबादी अब भी निम्न आय वर्ग में है। मतलब इस तरह की अपील का असर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए तो नहीं है और जो निन्म आय वर्ग में आते हैं वो किसी तरह अपना घर चला रहे हैं फिजूलखर्ची क्या करेंगे।
कौन कर रहा है फिजूलखर्ची
सवाल है कि अपील किससे करनी चाहिए, सीधा और सरल जवाब है उनसे जिनके पास पैसा है । World Inequality Report बताती है कि भारत के सबसे अमीर 10% लोगों के पास देश की लगभग 65% संपत्ति है। सबसे अमीर 1% लोगों के पास लगभग 40% संपत्ति है। Forbes और अन्य रिपोर्टों के अनुसार भारत के शीर्ष 100 अरबपतियों की कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक तक पहुंच चुकी है। देश में अमीरों की शादियों में होने वाला खर्च जोड़ना चाहिए, विदेशों में निवेश और खर्च कितना है जोड़ना चाहिए, ब्लैक मनी विदेश में है, उस पर सोचना चाहिए। असल में देश की अर्थव्यस्था को मजबूत करने के लिए सबसे ज्यादा योगदान कौन और कैसे निभा सकता है ? सवाल यह है और जवाब हम जैसे औसत पैसा कमाने वाले लोग जानते हैं।
फिर भी औसत पैसा कमाने वालों की स्थिति और अच्छी तरह समझनी है, तो जो भारतीय परिवार गरीबी रेखा से नीचे है या निम्न या मध्यमवर्गीय है वो तो मुश्किल से सोना खरीदने की सोच रहा होगा । रहा सवाल पेट्रोल का तो भारत के लगभग 50–55% परिवारों के पास कोई न कोई दोपहिया वाहन है। डाटा फॉर इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि भारत में केवल लगभग 8–9% परिवारों के पास कार-जीप है। तेल तो यहां भी कम ही खर्च हो रहा होगा क्योंकि बेवजह घूमने वाले भारतीय परिवारों का आंकड़ा कितना होगा ? अब रही बात विदेश यात्रा की तो टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि 2024–25 में लगभग 3–3.5 करोड़ भारतीयों ने विदेश यात्रा की इसमें रोजगार, पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले लोगों का आंकड़ा भी शामिल हैा। शौक से घूमने विदेश जाने वाले लोगों की आय क्या होगी अंदाजा लगाया जा सकता है।
यहां से बच सकता है ढेर सारा ईंधन और पैसा
यह तो साफ हो गया है कि जिनके पास पैसा है वही फिजूलगर्ची है, अब सवाल है क्या सरकार भी फिजूलखर्ची करती है ? एक RTI की रिपोर्ट जो टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी, दिल्ली पुलिस सिर्फ वीआईपी सुरक्षा के लिए गाड़ियाँ किराये पर लेने में लगभग 50 करोड़ सालाना खर्च करती थी। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया सुरक्षा पर लगभग 341 करोड़ सालाना खर्च होता है। देश की राजधानी है खर्च तो होंगे लेकिन राज्यों की स्थिति क्या है ? एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब में वीआईपी काफिले में लगभग 2.5 करोड़ सालाना खर्च था। सिर्फ तेल पर लगभग लगभग 1.65 करोड़ सालाना खर्च है।
अगर देश के कुल खर्च का आंकलन करें, तो सिर्फ काफिला में चलने वाले वाहनों में लगने वाले तेल का खर्च 500 करोड़ से 1500 करोड़ सालाना के आसपास आ सकता है। साल 2024 में झारखंड सरकार ने 17 बुलेटप्रुफ गाड़ियां खरीदी हैं जाहिर यह खर्च काफिले को और मजबूत करने के उद्धेश्य से किया गया है। राज्य में सिर्फ वीआईपी मुवमेंट और पेट्रोल में एक अनुमान के अनुसार 5 से 20 करोड़ का सालना खर्च होता है। सिर्फ वीआईपी मुवमेंट में चलनी वाली गाड़ियों में खर्च होने वाला पेट्रोल, वीआईपी मुवमेंट की वजह से ट्रैफिक लाइट पर आम लोगों की गाड़ियां रोक दी जाती है उनके समय की ईंधन की बर्बादी तो होती है। देश में जब सामान्य व्यक्ति से अपील की जा रही है तो क्या ऐसे समय में देश के नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों से यह अपील नहीं की जानी चाहिए कि आप भी खर्च में कटौती करें। पीएम मोदी ने यह अपील क्या साधारण वर्ग के लोगों के लिए की है या देश का हर विभाग, हर अधिकारी, हर व्यक्ति इस अपील के दायरे में आता है।

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