📅 Sunday, 17 May 2026
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अब डर लगने लगा है :  महंगाई बढ़ेगी, रोजगार घटेगा, खेती पर भी संकट

अब डर लगने लगा है :  महंगाई बढ़ेगी, रोजगार घटेगा, खेती पर भी संकट

पेट्रोल-डीजल में हुई तीन रूपए की बढ़ोतरी सिर्फ पेट्रोल-डीजल की नहीं है। ट्रासफोर्ट से जुड़ी हर चीज महंगी होगी। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स पैसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। खाने – पीने की ज्यादातर चीजें महंगी होगी। देश में किसानों को जैविक खेती की तरफ बढ़ने की प्रधानमंत्री ने अपील की है। देश में खाद की कमी है। दूसरी तरफ देश में सूखे की भविष्यवाणी हो रही है।  अब डर लगने लगा है…

सोशल मीडिया बढ़ा रहा है डर

सोशल मीडिया, मीडिया और समाचार पत्र इस डर को और बढ़ा रहे हैं। मेरी मित्रता सूची में कई वरिष्ठ पत्रकार हैं कईंयो ने लिखा है, कुछ बड़ा होने वाला है परेशान इसलिए हूं कि  ये पोस्ट पेट्रोल -डीजल के दाम तीन रूपए बढ़ने के बाद के थे। गैस की किल्लत के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े हैं जाहिर है कई और चीजें महंगी हो जायेंगी। स्पष्ट साफ है कि इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा लेकिन क्या सिर्फ महंगाई बढ़ने वाली है या कुछ और भी होने वाला है। अभी से कई न्यूज ऐप पर पढ़ रहा हूं कि इस बार मानसून में बारिश कम होने की संभावना है। देश सूखे की चपेट में आ सकता है।

क्या देश में सूखे का भी खतरा बढ़ रहा है

प्रशांत महासागर का तापमान इस बार मई में सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। यह गर्मी की स्थिति इस बार पूरे मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने जारी अनुमान में यह संभावना 61% थी, जो अब बढ़कर 82% हो गई है। भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि  असर मानसून पर पड़ेगा। देश में सूखे का खतरा है। इस पर ज्यादा समझना हो तो इंटरनेट पर अल नीनो ,क्या है सर्च कर लीजिए।

खाद की है कमी कैसे होगी खेती

एक तरफ सूखा दूसरी तरफ खाद की कमी।  यूरिया की कीमतें 510 डॉलर प्रति टन से बढ़कर लगभग 950 डॉलर तक पहुँच गई हैं। भारत के पास खरीफ सीजन के लिए जरूरी खाद का स्टॉक मांग के मुकाबले 51 प्रतिशत के करीब उपलब्ध है मतलब मांग से के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशथ कम।  घरेलू कारखानों में एलएनजी (LNG) की कमी के चलते यूरिया का उत्पादन भी गिरकर 1.5 मिलियन टन प्रति माह रह गया है, जो सामान्य से काफी कम है। जाहिर है महंगाई बढ़ेगी, खाने पीने के जरूरी सामान की कमी रहेगी।  

विदेशी मुद्रा का महत्व समझना जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ तौर पर विदेशी यात्रा और सोने की खरीद से बचने की अपील कर रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि विदेशी मुद्रा का जितना संचय किया जा सके । यह क्यों किया गया इस सवाल का जवाब तलाशेंगे तो पायेंगे मई 2026 तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज़ी से गिरावट देखने को मिली, जो लगभग 690.69 अरब अमेरिकी डॉलर रह गई, क्योंकि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये को स्थिर करने के लिये मुद्रा बाज़ारों में हस्तक्षेप किया था, जो हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर गया।

गहने खरीदने और संचय की परंपरा

सोना और चांदी के दाम में लगातार बढ़त देखी गई इसके बावजूद भी सोने और चांदी की खऱीद होती रही। भारतीय संस्कृति में त्योहार, शादी समेत कई मौकों पर इसकी जरूरत संस्कृति और परंपरा से जुड़ी है। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। वित्त वर्ष 26 में सोने के आयात बिल को रिकॉर्ड 71.98 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जो वर्ष 2022-23 में 35 अरब अमेरिकी डॉलर से लगभग दोगुना हो गया था।

पहले भी देश ने देखा है यह संकट

हालांकि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी देश ने आर्थिक संकट देखे हैं।  साल 1991 भारत के पास केवल कुछ दिनों तक आवश्यक वस्तुओं का आयात करने के पैसे थे। 1990-91 में भारी विदेशी कर्ज, राजनीतिक अस्थिरता थी। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग कम कर दी। रिजर्व बैंक ने करीब 46.91 टन सोना इंग्लैंड भेजा, जिसके बदले लगभग 405 मिलियन डॉलर मिले।  आर्थिक संकट के बीच 21 जून 1991 को पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में नई सरकार बनी। वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने देश में बड़े आर्थिक सुधारों की शुरुआत की।  भारत ने वर्ष 2025-26 में लगभग 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जो 1991 में जुटाई गई राशि से कई गुना अधिक है।

कब ठीक होंगे हालात

हालात पटरी पर आयेंगे। युद्ध खत्म होगा, चीजें धीरे- धीरे ट्रैक पर आयेंगी लेकिन इसमें समय लगेगा। हालात ऐसे हैं कि एक के बाद एक आ रही समस्या डरा रही है। दूसरी तऱफ इस समय मौजूदा हालात की तुलना कोरोना काल से की जा रही है। कई राज्यों में घर से काम करने के आदेश दे दिए गये हैं। अभी यह दौर गुजरा नहीं है बस डर यह है कि पता नहीं अभी और क्या- क्या देखना रह गया है।

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