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“असुर” इस वेबसीरीज को नहीं देखा है, तो पहली फुरसत में देखिये

“असुर” इस वेबसीरीज को नहीं देखा है, तो पहली फुरसत में देखिये

                                                                                                                                             
अंत अस्ति प्रारंभ  : अंत ही शुरुआत है. “असुर ” वेबसीरीज के आठों एपिसोड देखने के बाद जो लाइन आपके दिमाम में आती है वह यही है.  मैंने कई वेबसीरीज देखी हैं लेकिन  “असुर ” इस वेब सीरीज ने मन में जगह बना ली है. हम देव हैं या असुर हैं. हममें कितनी अच्छाई या बुराई है खुद से सवाल करते रहते हैं तो दूसरी तरफ इस सीरीज में एक कहानी के अंदर कई कहानियां है अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाते रहिये और ढुढ़ते रहिये कहानी का हर सिरा.  हर कहानी का अंत आपके आंकलन पर सही या गलत आपके आंकलन पर. 

कहानी की शुरुआत एक बच्चे के पिता के मौत से शुरू होती है और अंत उसी बच्चे की सीधे भगवान को चुनौती देने से खत्म.. इस आठ एपिसोड की कहानी में हर एपिसोड दमदार है. कई कहानियां ऐसी जिससे आपको लगे कि काश शास्त्र और पुरान का ज्यादा ज्ञान होता तो कहानी और बेहतर ढंग से समझ पाता.   कहानी का अंत जिस मोड़ पर होता है वहीं इस एक दृश्य याद आता है जब बच्चा जेल में होता है और दीवार पर लिखा होता है  अंत अस्ति प्रारंभ.. .यानि अंत ही शुरुआत है. 

आप कुंडली पर विश्वास करते हैं या नहीं. इस एपिसोड के बाद थोड़े अंधविश्वासी तो हो ही जायेंगे क्योंकि बताया गया कि धनिष्ठ नक्षत्र में पैदा होने वाले बड़े काम करते हैं या देव होते हैं. जरा पता कीजिए कि आप अपनी कुंडली में क्या है मैंने सुना है कि उसमें तीन तरह की कैटिगिरी है आप या तो देव है, मनुष्य हैं या असुर हैं.  अगर ग्रहों की स्थिति ठीक से समझना चाहते हैं और जन्म की पूरी कहानी सुनना चाहते हैं तो पंडित के पास नहीं इस वेबसीरीज के पास जाइये औऱ देखिये कि असुर और देवों के जन्म लेने की कहानी क्या है, आप सिर्फ देव और असुरों के जन्म की कहानी नहीं जानेंगे आप जानेंगे इस कहानी के बाद एक और कहानी जो इस सीरीज के एक पात्र से जुड़ी है. 

आप पता नहीं पूरी वेबसीरीज कितने ध्यान से देखेंगे या देखा है लेकिन उसकी कुछ लाइने रूक कर रिवाइंड करके सुनने लायक है जैसे ये वाली 
धुत्कार मानव समाज की प्रथम प्रतिक्रिया होती है. जब उनकी मान्यताओं पर प्रहार किया जाए. चाहे यह प्रहार उनके हित के लिए क्यों ना हो, क्योंकि सामान्य मनुष्य का सीमित ज्ञान उसे स्वंय से परे नहीं देखना देता है, फिर चाहे वो मानव जीवन हो, वास्तु क्रिया या नये विचार. ब्रहाम्ड में नव जीवन का सिचंन पुराने खंडर  की राख से ही लेता है.
 
अश्रु, रक्त, पीड़ा , निराशा एक साधारण मनुष्य इस मार्ग पर चलकर अजेय बन सकता है क्योंकि इन चारों की आयु मानव जीवन से कहीं अधिक है. अपनी इंद्रियों को वश में करके जैसे ही निरविकार होंगे फिर कोई शत्रु या भय हानि नहीं पहुंचा सकता.  यह एक अचर सनातक स्थिति नयी शक्ति को जन्म देती है. मानव स्वभाव के परिवर्तन से परे सर्वव्यापी , अनंत अंधकार परम सत्य है क्योंकि लगाव ही पीड़ा है , करुणा ही क्रुरता और अंत ही प्रारंभ. 

एक कहानी जिसे अगर पूर्वाग्रह और पहले की सुनी कहानियों से कथाओं से जोड़कर ना देखें और सिर्फ इस कहानी पर भरसो कर लें तो आपका जवाब क्या है
आदिकाल में तीन असुरों ने अपनी तपस्या से तीन उड़ते हुए नगरों की रचना की जो अकेले तोड़े नहीं जा सकते थे. देवता विष्णु के पास गये, विष्णु ने छल करके उनसे  पाप करवाये और शिव ने एक ही तीर से नगरों का विनाश किया. आपके अनुसार ये कहानी किसकी है. न्याय की शौर्य की, पश्चताप की या फिर छल की…..
 

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