📅 Tuesday, 6 October 2026
Breaking
रांची से मेघालय की रोड ट्रिप: पांच दोस्त, 3 हजार किमी का सफरक्यों बढ़ रहा है कैंसर ? WHO की चेतावनी 2050 हर साल 3.5 करोड़ तक पहुंचेगी यह बीमारीझारखंड क्यों नहीं आ रहे हैं लोग, पर्यटन में क्यों पिछड़ रहे हैं हमकितना भरोसेमंद AI ? क्या पूछें और क्या बिल्कुल नहीं, नकली केस, फर्जी फैसले और AI के पीछे की पूरी कहानीहत्या आसान रास्ता क्यों? जवाब तलाशती सिया, मुस्कान और सोनम के गुनाह की कहानीस्क्रीन के उस पार का सच: आपको बीमार कर रही है रील्सरांची से मेघालय की रोड ट्रिप: पांच दोस्त, 3 हजार किमी का सफरक्यों बढ़ रहा है कैंसर ? WHO की चेतावनी 2050 हर साल 3.5 करोड़ तक पहुंचेगी यह बीमारीझारखंड क्यों नहीं आ रहे हैं लोग, पर्यटन में क्यों पिछड़ रहे हैं हमकितना भरोसेमंद AI ? क्या पूछें और क्या बिल्कुल नहीं, नकली केस, फर्जी फैसले और AI के पीछे की पूरी कहानीहत्या आसान रास्ता क्यों? जवाब तलाशती सिया, मुस्कान और सोनम के गुनाह की कहानीस्क्रीन के उस पार का सच: आपको बीमार कर रही है रील्स
एक छोटी सी मुलाकात जो भूलना नहीं चाहता

एक छोटी सी मुलाकात जो भूलना नहीं चाहता

शरत शर्मा अपनी सवारी के साथ 

कई चेहरे अक्सर जाने पहचाने से लगते हैं. भले ही पहली मुलाकात
हो, लेकिन लगता है पहले मिल चुके हैं. हम सभी के साथ ऐसा होता है लेकिन कुछ चेहरे
दिमाग में घर कर जाते हैं. भले मुलाकात थोड़ी देर की, हो लेकिन सालों बाद भी मिले,
तो भूल नहीं पाते. हम उस वक्त भले ना याद आता हो लेकिन उस चेहरे में कोई ना कोई
बात तो होती है जो दिलो दिमाग में घर कर लेती है.  मैं एक पत्रकार के रूप में हर रोज दोनों तरह के
लोगों से मिलता हूं. कई के चेहरे याद रहते हैं कुछ के नाम. संभव है कि उनका  नाम भूल जाऊं. लेकिन उनकी कहानी नहीं भूल
पाऊंगा. चेहरा और नाम भी याद रख सकूं इसलिए यह पोस्ट लिख रहा हूं. जरूरी चीजें
छोटे से डायरी में नोट करनी चाहिए यह पोस्ट उसी डायरी के पन्ने की तरह होगी…


नाम
–
शरत शर्मा

उम्र – 60 साल

पेशा-
रिटायर्ड बन नोट टायर्ड पत्रकार ( टाइम्स ऑफ इंडिया)
शौक– बाइक

सपना-
भारत भ्रमण
उनकी कहानी याद रखने की वजह- सपने के पीछे भागने वाला अपनी तरह का पागल आदमी

संबंध
– जैसे खून से खून का रिश्ता होता है वैसे  ही एक बाइकर का बाइकर से. अपन दसवीं में हैं तो
बंदा पीएचडी कर रहा है.
मुलाकात कैसे हुई
21 जून 2018 रात के तकरीबन दस बजे. बिहार ( पटना ) से सहयोगी
समीर जी का फोन आया. फोन पर उन्होंने कहा, आपके मिजाज के एक सज्जन कल रांची पहुंच
रहे हैं. बाइक पर भारत घूमने निकले हैं. इन दो लाइनों ने मेरे सपनों की धुंधली परत
को जैसे साफ कर दिया अंदर का बाइकर जो कई महीनों से सो रहा था हड़बड़ा कर उठा.
समीर जी का आभार की उन्होंने मेरा मिजाज समझा और उनसे मुलाकात करायी. तीन बजे शरत
रांची पहुंचे, मैं इंतजार में था लेकिन जानकारी थी कि बाइक चलाते वक्त वह फोन का
इस्तेमाल नहीं करते. 


दोपहर के तीन बजे बारिश में भीगता आफिस पहुंचा था कि शरत का
फोन आया, मैं अभी रांची पहुंचा हूं. ऑफिस से आईपैड लिया और साथी अमिताभ के साथ
इंटरव्यू के लिए निकल गया. उनके सफर को लेकर कई सवाल थे मेरे मन में. बहुत लंबी
बातचीत हुई. प्रभात खबर के फेसबुक पेज पर आधे घंटे से ज्यादा हमारी बकबक चली. शरत
60 की उम्र के बाद अपने सपने को पूरा कर रहे हैं. मैं इस मुलाकात का निष्कर्ष
निकाल कर इसे ठीक से खत्म नहीं करना चाहता. इसे मुलाकात को अधूरा रखूंगा क्योंकि
मेरे सपने भी उन्ही की तरह है पर अधूरे हैं. जब मेरे सपने पूरे होंगे तो इस छोटे
पड़ाव का जिक्र जरूर होगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *