📅 Wednesday, 3 June 2026
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गरीबों को पीटकर क्राइम कंट्रोल कर रही है झारखंड पुलिस

गरीबों को पीटकर क्राइम कंट्रोल कर रही है झारखंड पुलिस

हम है, हम है झारखंड पुलिस 

ट्रेन में खचाखच भीड़ थी, इतनी भीड़ की पैर रखने की जगह नहीं, मैं दरवाजे के पास खड़ा था। दरोगा साहेब सबको दरवाजे से अंदर धकेल रहे थे, अपने डंडे को लोगों को सीने पर पेट पर लगाकर धकेल रहे थे। मेरे पास पहुंचे तो डंडा आधे में रोक लिया और इशारे से कहा अंदर चलिए, मैंने कहा जगह ही नहीं तो पास खड़े दूसरे व्यक्ति को डंडे से धकेला और बोला चलिए अंदर चलिए और आगे बढ़ गये। 

मेरे आसपास के लोग घूर रहे थे कि इसे क्यों नहीं धकेला  उनकी आंखे मुझसे ये सवाल कर रही थी कि ये हुआ क्यों, सच पूछिए तो जवाब मेरे पास भी नहीं था। मैं काफी देर तक सोचता रहा कि ऐसा क्यों हुआ। मुझे इसका जवाब मिला ट्रेन के बाथरूम में लगे शीशे से, मेरी शर्ट का रंग सफेद था। परीक्षा देने जा रहा था तो फॉर्मल सफेद रंग की शर्ट पहनी थी दरोगा साहेब जानते थे कि सभी बच्चे परीक्षा लिखने जा रहे हैं उन्हें शायद लगा हो कि डंडे से शर्ट में दाग लगने की संभावना है.. आज तक कोई दूसरी वजह मुझे तो समझ नहीं आयी। 

आप सोच रहे होंगे अचानक मुझे इस घटना की याद क्यों आयी। राजधानी में आज यही हाल देख रहा हूं। राज्य में कानून व्यवस्था की हालत खराब है। चोरी, हत्या, लूट, बलात्कार, गैंगवॉर सब हो रहा है और एक्शन हो रहा है ठेला लगाने वाले उन गरीब लोगों पर जो मुश्किल से सड़क किनारे एक छोटी सी गुमटी लगाकर परिवार का पेट पाल रहे हैं। पुलिस इन पर डंडा चलाने से पहले एक बार भी नहीं सोचती। कल एक दरोगा साहेब मिले थे कह रहे थे साहेब लोग का आदेश है कि पहले मारो फिर बात करो। कई साधारण लोगों ने पुलिस का डंडा खाया है, बगैर किसी दोष के विरोध भी नहीं करते मैंने अक्सर सुना है कौन इनके मुंह लगेगा।  

रांची के मोरहाबादी में गैंगवॉर में गोली चली तो पूरा मोरहाबादी ही उजाड़ दिया गया। शाम में कई लोग दफ्तर से काम कर यहां पहुंचते थे, गप्पे मारते थे, चाय पीते कई दुकानदारों का पेट चलता था। एक गोलीबारी ने कई घरों को एक साथ बर्बाद कर दिया। जूस की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने आत्महत्या कर ली। 

कई महीनों तक दुकानदार लड़ते रहे इनकी मजबूरी का फायदा उठाने वाले कई नेता पैसे की उगाही में व्यस्त रहे पिसता रहा आम आदमी, गरीब आदमी  कई महीनों बाद जगह मिली तो फिर डंडे चलने लगे क्योंकि एक बार फिर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। पुलिस की कार्य शैली पर , राज्य की कानून व्यस्था पर जब- जब सवाल खड़ा हुआ इन दुकानदारों की पीठ पर लाठी बरसा कर पुलिस ने जवाब देने की कोशिश की। 

रांची के मोरहाबादी मैदान में चाऊमिन की दुकान लगाने वाले एक दुकानदार को पुलिस मार रही थी। क्योंकि इसी दुकान के पास कुछ लोग शराब पी रहे थे, पुलिस को देखते ही शराबी भाग निकले इनके हत्थे चढ़ा दुकान वाला। दुकान वाला 19 साल का एक लड़का था, पुलिस ने पहले तीन चार डंडे लगाए फिर उससे कहा पैंट उतारो, लड़का किसी तरह पैंट पकड़े उसे उतरने से रोकने की कोशिश कर रहा था और पुलिस वाले डंडे चलाकर उससे पैंट उतारने के लिए कह रहे थे, हम पास खड़े थे जब रहा नहीं गया तो भागकर पहुंचे पुलिस वालों से बहस हुई बवाल बढ़ा अंत में मामला शांत हुआ दुकानदार को छोड़ा। 

आप एक व्यापारी के नजरिए से सोच कर देखिए आप एक दुकानदार है, चार शराबी दुकान पहुंचते हैं और कहते हैं चिकन चिल्ली बनाओ, आपमें हिम्मत है कि आप कह सकें कि नई बनायेंगे। जो शराब के नशे में है, बदमाश हैं वो इतने समझदार होंगे कि आपका ज्ञान सुन सकेंगे। 

जिस शहर में नाइट मार्केट का कॉन्सेप्ट कई दिनों तक चला वहां आप शाम सात बजे एक अच्छी जगह नहीं तलाश सकते जहां आप बैठकर दोस्तों के साथ चाय पी सकें। दफ्तर की सारी परेशानी साझा कर सकें। क्राइम कंट्रोल का एक मात्र उपाय लॉक डाउन तो नहीं है कि शहर ही बंद कर दो। कहीं भी बैठो पुलिस वाले आयेंगे कहेंगे चलिए यहां से कोई उनसे पूछे कहां जाएं जिन अपराधियों पर आपको नजर रखनी चाहिए रख तो नहीं पा रहे। 

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