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जिंदगी…….

जिंदगी…….

जिंदगी…….

जिंदगी एक आस है, लेकिन कहना है मुश्किल की ये एक खूबसूरत एहसास है
प्यार उन्हें है जिंदगी से खोने के लिए जिनके कुछ ना पास है क्या कहें कैसे कटती है है जिंदगी उनकी जिनके पास खाने को गम के सिवा कुछ ना पास है.
ऐसा नहीं कि वो मेहनती नहीं. क्या दिन भर ठंड में, धुप में बरसात में रिक्शा चलाना, ठेले लगाकर किसी की आस में खड़े रहना जिंदगी जीने के लिए कम योगदान है
शायद वहीं दुनिया में सुखी है जो मेहनती नहीं, दिनभर कमरों में बैठकर थक जाना आदत है जिनकी. शाम को बन ठन कर बाहर निकलना पहचान है जिनकी
एक सवाल है जिंदगी से ऐ जिंदगी तु तो कहती है सुख और दुख सिक्के के दो पहलु है तो क्या सुख अमीरों के लिए और दुख गरीबों का है. ऐ जिंदगी गरीबों को तुझसे आस है जरा सोच एक तेरे सहासे के सिवा उनके और क्या पास है.
तु कुछ ऐसा कर कि उन्हें भी प्यार हो तुझसे जिदंगी किसे कहते है ये अहसास हो तुझसे गम में डुबे आखों को खुशी की चमक तो दे, उन्हें अपनी खूबसूरत महक तो दे
दर्द उन्हें दे जो दर्द का दर्द समझ नहीं पाते, तेरी दी हुई खुशी को बस मजाक में डाल जाते. इन्हें दर्द का रास्ता दे और गरीबों को उन्ही की खुशियों का वास्ता दे.
जब लोग दर्द का दर्द समझ पायेंगे तो देखने उन खुशियों को पाने के लिए तेरे पास दौड़े चले आयेंगे.        

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