📅 Saturday, 20 June 2026
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फिल्म छंलाग समझाती है जीत से ज्यादा लड़ाई मायने रखती है

फिल्म छंलाग समझाती है जीत से ज्यादा लड़ाई मायने रखती है

जीतने का जज्बा और सीखने की ललक हो तो हारना मुश्किल है. ये लाइन फिल्मी सी लग रही है ना, ठीक है आर्टिकल पढ़कर पूरा खत्म कर लेंगे तो, इस लाइन को  पढ़ियेगा भरोसा दिलाता हूं फिल्मी नहीं लगेगी.  अभी- अभी अमेजन प्राइम पर फिल्म छलांग देखकर खत्म की. यहां लड़ाई एक नौसिखिये मास्टर और एक तेज तर्रार  टीचर के बीच होती है. दिमाग कहता है अगर ये नौसिखिया मास्टर जीता, ना तो कहानी पूरी फिल्मी हो जायेगी, नौसिखवा मास्टर जीत जाता है लेकिन दिमाग इसे फिल्मी नहीं मानता.

हम देशी लोग हैं. परफेक्ट तो हैं नहीं, कमियां भरी है लेकिन जीत की चाहत कुछ भी करा लेती है. कहानी इतने शानदार तरीके से लिखी गयी है कि बांध लेती है. ऐसा नहीं है कि ऐसी फिल्में जिसमें लड़का, लड़की का भेद दूर करने का संदेश हो, पढ़ाई औऱ खेल दोनों को बराबर का महत्व देने का ज्ञान हो पहले नहीं बनी पहले भी बनी है और ऐसा भी नहीं है कि इन संदेशों को किसी नये तरीके से कहा गया है लेकिन देखने में अच्छे लगते हैं. 

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हम मीडिल क्लास और हारे हुए लोग हैं, वैसे लोग जिन्होंने लड़ाई कभी जमकर लड़ी ही नहीं, बस सारे गणित दिमाग में बिठा लिये और हार मान ली. फिल्म आपको इस हार का अहसास कराती है. फिल्म में एक संवाद है जिसमें हीरो अपने पिता से कहता है हमने हर चीज छोड़ी ही तो है, साइंस नहीं ली क्योंकि फिजिक्स समझ नहीं आती, वकील नहीं बना क्योंकि किताबें मोटी लगती थी हर चीज तो इसी तरह छोड़ी है.हमने भी जिंदगी में कई चीजें ऐसे ही तो छोड़ी है.

हर लड़ाई सिर्फ हमने दिमाग से लड़ी परिणाम निकाला औऱ छोड़ दी, जो लड़ाई जीत ली उसे भी एक पड़ाव के बाद छोड़ दी. हम सभी हारते ही तो रहे हैं, दिल से दिमाग से लड़े ही नहीं. फिल्म मुझे इसलिए अच्छी लगी क्योंकि वो लड़ना सीखता ही और यही बात वो दूसरे फिल्मों की तरह नहीं हटकर कहती है. एक कमजोर टीम जिसका हर खिलाड़ी हारा हुआ है. 

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एक कोच जो खुद कमजोर है जिसे स्पॉट्स की जानकारी नहीं है वह खिलाड़ियों को सीखा रहा है, जरा सोचिये आपके दिमाग का गणित  कहता है यह जीतेंगे ? फिर भी जीतते हैं, आपको भी मेरी तरह लग रहा है ना कि ऐसा फिल्मों में होता है, तो जरा आसपास देखिये ऐसे कई लोग आपको बड़े पदों पर, बड़ी कुर्सियों पर नजर आयेंगे जो इसी हीरो की तरह हैं जिसे कुछ नहीं आता, पता है वो आपसे ऊंची कुर्सी पर क्यों बैठे हैं ?  क्योंकि उन्होंने हार नहीं मानी लड़े और जीते. दिमाग के गणित की नहीं सुनी, अपनी कमजोरियों की नहीं सुनी. फिल्म देखियेगा तो कुछ सोचियेगा,  सीखियेगा.  

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