
कैंसर बढ़ रहा है मैंने अपने जीवन में कैसर के जितने भी मामले सुने वो पिछले कुछ सालों में ही सुने। सबसे पहले हमारी फुआ दादी को कैंसर की खबर सुनी फिर वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश फिर बड़े भाई अमित भैया फिर हमारे मामा जी को यह बीमारी हुई इसके बाद हमारे साथ काम करने वाले वरिष्ठ सहयोगी अमलेश नंदन सिन्हा की पत्नी को कैंसर हुआ। अब प्रभात खबर में काम करने वाले भाई तरूण की पत्नी को कैंसर की खबर सोशल मीडिया से मिली। यकीन मानिए यह पिछले कुछ सालों में इतना बढ़ है कि जैसी खबरें मैंने पिछले 20 से 25 साल में नहीं सुनी पिछले कुछ सालों में हर छह महीने में सुन रहा हूं।
बीमारी से ज्यादा खतरनाक होता है मानिसक और आर्थिक बोझ
यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि जो बीमार है वो तो लड़ ही रहा है लेकिन उसके साथ पूरा परिवार लड़ता है। इंसान आर्थिक, मानसिक, शारीरिक तौर पर टूट जाता है। WHO की 2026 रिपोर्ट में कैंसर से प्रभावित लोगों के पहले वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार कम से कम 45 प्रतिशत लोगों ने कैंसर के दौरान आर्थिक संकट का सामना किया। मैंने अब तक जितने भी मामले कैंसर के सुने उसमें से ज्यादातर में लोगों ने सहयोग किया किसी का घर, गहने, पुरखों की संपत्ति तक बेचनी बड़ी।
तरुण की मदद करना जरूरी है, ऐसे समय आपकी छोटी सी मदद उसके लिए बड़ी साबित हो सकती है। तरुण ने एक पोस्ट लिखा है उसे साझा कर रहा हूं, साथ ही क्यूआर कोड भी डाल रहा हूं अगर आप उसकी थोड़ी भी मदद कर पायें तो यह पोस्ट सार्थक साबित होगा।

तरुण का पोस्ट
यहां कर सकते हैं मदद

आंकड़ों के इशारे समझिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जुलाई 2026 में जारी Global Status Report on Cancer 2026 के आकड़े बताते हैं कि हर वर्ष करीब 1 करोड़ लोगों की कैंसर से मौत हो जाती है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार एशिया में दुनिया के कुल नए कैंसर मामलों का 50.7 प्रतिशत और कैंसर से होने वाली मौतों का 56.5 प्रतिशत रखता है।
बढ़ते कैंसर के मामलों में तीसरे स्थान पर है भारत
भारत कहां खड़ा है, दुनिया में भारत तीसरे स्थान पर है। GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में लगभग 1.998 करोड़ नए कैंसर मामले दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे अधिक मामले चीन में लगभग 48.25 लाख थे। इसके बाद अमेरिका में लगभग 23.80 लाख, भारत में 14.13 लाख और जापान में 10.05 लाख मामले थे। इसके बाद रूस में लगभग 6.36 लाख और ब्राजील में लगभग 6.27 लाख मामले दर्ज किए गए।
देश के किन राज्यों में सबसे ज्यादा कैंसर के मामले
भारत में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले कहां है ? जवाब है उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य। झारखंड में कैंसर के बढ़ते मामले भी बड़ी चिंता का कारण है। राज्य में हर वर्ष लगभग 35,000 से 40,000 केस हैं। कैंसर की incidence rate लगभग 70 लोग प्रति 100,000 दर्ज की गई है।बिहार में हर वर्ष 110,000 से अधिक नए कैंसर मामले हैं।
महिलाएं या पुरुष कौन हो रहे हैं ज्यादा बीमार
मेरी जानकारी में अब तक तीन महिलाएं और तीन पुरुष कैंसर का शिकार हुए हैं। विभिन्न वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्ट्स (जैसे लैंसेट ऑन्कोलॉजी) के अनुसार, दुनिया भर में पुरुषों में कैंसर के मामले महिलाओं की तुलना में लगभग 25% अधिक दर्ज किए जाते हैं।
क्यों बढ़ रहा कैंसर
तंबाकू, बढ़ता फार्स्ट फूड का कल्चर, अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता और कम फल-सब्जियों का सेवन WHO और IARC की रिपोर्ट भी यही कहती है। इसके अलावा बढ़ता प्रदूषण आर्सेनिक जैसे रसायन, एस्बेस्टस, कुछ कीटनाशक और अन्य कैंसरकारी पदार्थ भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। जैसे-जैसे आबादी में बुजुर्गों की संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे कैंसर के कुल मामलों की संख्या भी बढ़ने की संभावना रहती है।
जब यह समझ आ रहा है कि कैंसर क्यों बढ़ रहा है तो इसकी रोकथाम कैसे होगी यह भी आसानी से समझा जा सकता है। IARC के 2026 के अध्ययन के अनुसार 2022 में कैंसर से हुई मौतों में लगभग 48 प्रतिशत मौतों को प्राथमिक रोकथाम, शुरुआती पहचान और प्रभावी उपचार में सुधार के माध्यम से टाला जा सकता है।
C – Control Carcinogens (कार्सिनोजेनों पर नियंत्रण)- तंबाकू नियंत्रण
U – Universal Vaccination & Screening (टीकाकरण और शुरुआती जांच)
HPV और हेपेटाइटिस-B जैसे संक्रमणों के विरुद्ध उपयुक्त टीकाकरण
R – Robust Treatment Infrastructure (सुदृढ़ उपचार अवसंरचना)
कैंसर के इलाज में सर्जरी, रेडियोथेरेपी और विभिन्न प्रकार की प्रणालीगत चिकित्सा की आवश्यकता
E – Evidence & Research (साक्ष्य और अनुसंधान)
हमें क्या करना चाहिए
कैंसर के बढ़ते मामले ना सिर्फ सवाल खड़े करते हैं बल्कि हमसे जवाब भी मांगते हैं। हम कितना पैदल चलते हैं, क्या हम अपने पूरे शरीर को थका पाते हैं। शहर में रहने वाले लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ रही है तो बीमारियों को खतरा भी बढ़ रहा है। फ्लैट में रह रहे हैं तो लिफ्ट, घर में रह रहे हैं तो सब्जी लेने के लिए बाइक या स्कूटी, हम में से कई लोग पैदल चलना ही छोड़ देते हैं। हम खा क्या रहे हैं। मोमो, मैगी, चाऊमिन, पास्ता, बर्गर, फ्राई चिकन, मटन, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक। हमारे प्लेट से हरी सब्जियां गायब हो रही है। बड़ी बीमारी कई संकेत और चेतावनी के बाद दस्तक देती है। अच्छा भोजन, नियमित व्यायाम या योग, हर साल पूरे शरीर की जांच जरूरी है।

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