📅 Tuesday, 6 October 2026
Breaking
रांची से मेघालय की रोड ट्रिप: पांच दोस्त, 3 हजार किमी का सफरक्यों बढ़ रहा है कैंसर ? WHO की चेतावनी 2050 हर साल 3.5 करोड़ तक पहुंचेगी यह बीमारीझारखंड क्यों नहीं आ रहे हैं लोग, पर्यटन में क्यों पिछड़ रहे हैं हमकितना भरोसेमंद AI ? क्या पूछें और क्या बिल्कुल नहीं, नकली केस, फर्जी फैसले और AI के पीछे की पूरी कहानीहत्या आसान रास्ता क्यों? जवाब तलाशती सिया, मुस्कान और सोनम के गुनाह की कहानीस्क्रीन के उस पार का सच: आपको बीमार कर रही है रील्सरांची से मेघालय की रोड ट्रिप: पांच दोस्त, 3 हजार किमी का सफरक्यों बढ़ रहा है कैंसर ? WHO की चेतावनी 2050 हर साल 3.5 करोड़ तक पहुंचेगी यह बीमारीझारखंड क्यों नहीं आ रहे हैं लोग, पर्यटन में क्यों पिछड़ रहे हैं हमकितना भरोसेमंद AI ? क्या पूछें और क्या बिल्कुल नहीं, नकली केस, फर्जी फैसले और AI के पीछे की पूरी कहानीहत्या आसान रास्ता क्यों? जवाब तलाशती सिया, मुस्कान और सोनम के गुनाह की कहानीस्क्रीन के उस पार का सच: आपको बीमार कर रही है रील्स
Lockdown and Labour (नमक खाकर जी लेंगे लेकिन शहर नहीं लौटेंगे- मजदूर)

Lockdown and Labour (नमक खाकर जी लेंगे लेकिन शहर नहीं लौटेंगे- मजदूर)

प्रवासी मजदूर जो बड़े शहरों को और बड़ा बना रहे थे उनकी हालत समझिये, Stranded Workers Action Network (SWAN) के द्वारा किया गया सर्वे बताता है, अप्रैल 8 से अप्रैल 13 के बीच लगभग 90 फीसद प्रवासी मजदूरों को राशन नहीं मिला. लगभग 90 फीसद को उनका वेतन नहीं मिला. मार्च 27 से लेकर अप्रैल 13 तक 70 फीसद प्रवासी मजदूरों के पास सिर्फ 200 रुपये बचे थे. 72 फीसद प्रवासी मजदूरों का कहना है कि उनके पास जो राशन है वह दो दिनों में खत्म हो जायेगा. 44 फीसद लोग ऐसे हैं जिन्होंने एक वक्त का खाना छोड़ दिया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *