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Subarnarekha River Origin :16 किमी का सफर तय करने से पहले मैंने 474 किमी की यात्रा की

Subarnarekha River Origin :16 किमी का सफर तय करने से पहले मैंने 474 किमी की यात्रा की

Subarnarekha River Origin : रांची से मात्र 16 किमी की दूरी है, जहां से स्वर्णरेखा निकलती है लेकिन इस दूरी को तय करने से पहले मैंने 474 किमी की दूरी तय की ओड़िशा के विचित्रापुर में स्वर्णरेखा का सफर खत्म होता है. इसके बाद मैं इन 16 किमी की दूरी को तय करने में सफल रहा. 

स्वर्णरेखा नदी रांची से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित नगड़ी गांव के रानी चुआं नाम की जगह से निकलती है. यहां एक कुआं बना है जिससे हमेशा पानी निकलता है और ऐसा माना जाता है कि यही वो जगह जहां से स्वर्णरेखा की शुरुआत होती है लेकिन इस कुआं के थोड़ा और पहले एक जगह ऐसी जहां सालों भर पानी रहता है कुछ लोग बताते हैं असल जगह तो यह है.  

इस जगह से कई कहानियां जुड़ी हैं, कुछ ऐतिहासिक तो कुछ डरावनी भी. ऐतिहासिक कहानियां कई जगह पढ़ सकते हैं मैं थोड़ी डरावनी वाली सुनाता हूं जो एक बच्चे ने मुझे बताया उसने अपनी दादी से सुनी थी जिस जगह से स्वर्णरेखा निकलती है वहां गहरी खाई है. इसके अंदर – अदर रास्ता है. 

क्लिक करें –  जहां खत्म होता है स्वर्णरेखा नदी का सफर 

मैं ओड़िशा के विचित्रापुर होकर आया हूं तो दोनों जगहों की तुलना भी कर रहा था. विचित्रापुर को जिस तरह से बनाया गया है वहां पर्यटकों के लिए नांव, रहने की व्यस्था और घूमने के लिए सारी सुविधाएं हैं लेकिन यहां ऐसा कुछ भी विकसित करने की कोशिश नहीं हुई. हां मंदिर हैं, टिन के चादर में हरे रंग के पेंट में कुछ जानकारियां है और कुछ नहीं यहां पास ही एक तालाब है शिव मंदिर है, शांति, हरियाली और सुकून सब है जो आप ऐसी जगहों पर तलाशते हैं.  

यहां से अगर आप नदी का रास्ता ढुढ़ने की कोशिश करेंगे तो आपको खेत के सिवार कुछ और नजर नहीं आयेगा ना ही स्वर्णरेखा का पानी बहता हुआ नजर आयेगा. यही पानी धीरे- धीरे खेतों में होता हुआ आगे बढ़ता है इसका कोई तय रास्ता नहीं दिखता. 

ग्रामीणों से पता चला कि पांडुटोली से आपको स्वर्णरेखा के नदियों का रास्ता नजर आने लगेगा. वहां हमें एक पुल जरूर मिला लेकिन पानी कहीं से निकलता नहीं दिखा. यहां एक श्मशान घाट जरूर दिखा पुल के नीचे जमा हुआ पानी दिखा लेकिन स्वर्णरेखा के सफर की शुरुआत यहां से नहीं दिखी. 

हम ये तलाशते रहे कि आखिर कहां से नदी अपना सफर शुरू करती है यह तलाशते – तलाशते हम स्वर्णरेखा के रास्ते भटकते रहे हमें अंत में टिकरा टोली के पास स्वर्णरेखा में बना एक बड़ा सा पुल मिला यहीं से हमें दिखा रास्ता जो स्वर्णरेखा बनाने लगती है. नाले की तरह ही सही लेकिन स्वर्णरेखा के सफर की शुरुआत यहां से हो जाती है. 

इस सफर का शुरुआत में सफर का अंत नहीं है. मैं स्वर्णरेखा के कई रहस्यों के तलाश की योजना बना रहा हूं . कोशिश करूंगा स्वर्णरेखा के सोने की तलाश का सफर करूं और आप साथ यात्रा करें. यात्रा की शुरुआत कब होगी पता नहीं फिलहाल मेरे यूट्यूब चैनल पर स्वर्णरेखा के शुरुआत के सफर की कहानी  कड़ी दर कड़ी आयेगी वक्त मिले तो देखियेगा 

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